Mutual Funds: Which Date is Best to Start Your SIP for Maximum Returns?

Nivesh NestPersonal FinanceMutual Funds3 months ago14.1K Views

Start Your SIP for Maximum Returns

Which Date is Best to Start Your SIP for Maximum Returns? : भारतीय निवेशकों के बीच Systematic Investment Plan (SIP) तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। लेकिन एक सवाल हमेशा चर्चा में रहता है – SIP शुरू करने के लिए महीने की कौन सी तारीख सबसे बेहतर है? क्या हमें हर महीने की 1 तारीख, 10 तारीख या फिर 25 तारीख को SIP करनी चाहिए? क्या तारीख बदलने से आपके रिटर्न पर कोई बड़ा असर पड़ता है?

इस ब्लॉग में हम 15+ साल के मार्केट डेटा और रिसर्च के आधार पर आपको इसका साफ और आसान जवाब बताएंगे, ताकि आप अपने SIP निवेश को सही दिशा दे सकें।

विस्तृत डेटा एनालिसिस यह दिखाता है कि अगर आप हर महीने 25 तारीख को SIP करते हैं, तो बाकी तारीखों की तुलना में रिटर्न थोड़ा बेहतर (लगभग 0.1% से 0.4% सालाना) हो सकता है। लेकिन यह अंतर इतना छोटा है कि इसे “सबसे बेस्ट SIP तारीख” कहना व्यावहारिक नहीं है।

असल मायने में, SIP निवेश में सही तारीख चुनने से ज्यादा ज़रूरी है निरंतरता और अनुशासन। यानी आप किस दिन निवेश करते हैं, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, बल्कि इस बात से फर्क पड़ता है कि आप बिना रुके, हर महीने नियमित रूप से SIP करते रहें।

👉 आसान शब्दों में कहें तो, “SIP की सही तारीख” ढूँढने से ज्यादा फायदेमंद है लंबे समय तक नियमित निवेश करना।

SIP निवेश की सही तारीख कौन सी है?

Start Your SIP for Maximum Returns: SIP तारीख का वैज्ञानिक विश्लेषण

15 साल के डेटा का विस्तृत अध्ययन

Prime Investor के अध्ययन के मुताबिक SIP निवेश की तारीख पर बड़ा असर पड़ता है।
इस रिसर्च में Nifty 100 और Nifty 500 इंडेक्स के पिछले 15 साल (2008 से 2022) के डेटा का गहराई से विश्लेषण किया गया। इसमें अलग-अलग तारीखों – यानी हर महीने की 5वीं, 15वीं और 25वीं तारीख को किए गए SIP निवेश के रिटर्न की तुलना की गई।

SIP returns comparison across different investment dates showing minimal differences

SIP निवेश की सही तारीख कौन सी है?

SIP निवेश की सही तारीख: 5 साल, 10 साल और 15 साल का रिटर्न तुलना

अगर हम SIP निवेश की सही तारीख को लेकर पिछले 15 साल के रिटर्न्स का विश्लेषण करें, तो साफ पता चलता है कि 25वीं तारीख को SIP करने वाले निवेशकों को सबसे बेहतर रिटर्न मिला है।

  • 5 साल की अवधि (2008-2012):
    • 25 तारीख – 8.0% रिटर्न
    • 5 तारीख – 7.8% रिटर्न
    • 15 तारीख – 7.6% रिटर्न
  • 10 साल की अवधि (2013-2022):
    • 25 तारीख – 12.3% रिटर्न
    • 5 तारीख – 12.1% रिटर्न
    • 15 तारीख – 11.9% रिटर्न
  • 15 साल की अवधि (2008-2022):
    • 25 तारीख – 12.0% रिटर्न
    • 5 तारीख – 11.8% रिटर्न
    • 15 तारीख – 11.6% रिटर्न

👉 कुल मिलाकर देखा जाए तो चाहे 5 साल हों, 10 साल हों या 15 साल – SIP की 25वीं तारीख पर निवेश करना सबसे फायदे का सौदा रहा है।

व्यावहारिक प्रभाव कितना कम है?

👉 अगर आप ₹10,000 की मासिक SIP करते हैं और इसे 10 साल तक जारी रखते हैं, तो आपका कुल निवेश ₹12,00,000 होगा।
अब ज़रा देखें अंतर—

  • 15 तारीख को SIP करने पर फंड वैल्यू होगी: ₹22,05,085
  • 25 तारीख को SIP करने पर फंड वैल्यू होगी: ₹22,08,778

यानि दोनों तारीखों के बीच का अंतर सिर्फ ₹3,693 (0.17%) है।

इसका मतलब यह हुआ कि SIP की तारीख बदलने से रिटर्न पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता। आपके लिए सबसे ज़रूरी है नियमित निवेश करना, न कि यह सोचना कि कौन-सी तारीख ज़्यादा फायदेमंद होगी।

SIP निवेश की सही तारीख: 1, 10 या 25 – कौन सा दिन है सबसे फायदेमंद?

SIP (Systematic Investment Plan) में निवेश करते समय यह सवाल अक्सर आता है कि महीने की कौन सी तारीख सबसे सही रहती है। अक्सर लोग 1 तारीख, 10 तारीख या 25 तारीख को पसंद करते हैं। आइए हम इन तीनों तारीखों का सरल और आसान विश्लेषण करें।

1 तारीख – महीने की शुरुआत

फायदे:

  • सैलरी मिलने के तुरंत बाद निवेश करना संभव
  • पैसे खर्च होने से पहले निवेश की गारंटी
  • याद रखना आसान
  • ज्यादातर म्यूचुअल फंड हाउसेस में उपलब्ध

नुकसान:

  • अगर सैलरी 1 तारीख के बाद आती है तो निवेश बाउंस का खतरा
  • महीने की शुरुआत में ज्यादा institutional फ्लो के कारण NAV (नेट असेट वैल्यू) में मामूली वृद्धि

10 तारीख – महीने का मध्य

फायदे:

  • ज्यादातर लोगों की सैलरी मिलने के बाद सुरक्षित समय
  • मध्यम मार्केट वोलैटिलिटी का एक्सपोज़र
  • बेहतर कैश फ्लो मैनेजमेंट

नुकसान:

  • मार्केट में कोई खास एडवांटेज नहीं
  • रिटर्न में ज्यादा अंतर नहीं

25 तारीख – महीने का अंत

फायदे:

  • F&O एक्सपायरी के समय संभावित वोलैटिलिटी का लाभ
  • रिसर्च डेटा के अनुसार मामूली बेहतर रिटर्न
  • महीने के अंत में रिबैलेंसिंग का फायदा उठाने का मौका

नुकसान:

  • अगर पैसे महीने के अंत तक खर्च हो जाएं तो दिक्कत
  • वीकेंड या हॉलिडे के कारण तारीख शिफ्ट हो सकती है

💡 निष्कर्ष:
SIP निवेश की सही तारीख पूरी तरह आपकी सैलरी और कैश फ्लो पर निर्भर करती है। अगर आप महीने की शुरुआत में निवेश कर सकते हैं तो 1 तारीख ठीक है, मध्य में 10 तारीख सुरक्षित विकल्प है, और अगर आप महीने के अंत का थोड़ा रिस्क ले सकते हैं तो 25 तारीख बेहतर रिटर्न दे सकती है।

F&O एक्सपायरी का असर: क्या सच में काम करता है?

अगर आप निवेश करते हैं, तो आपने शायद सुना होगा कि F&O एक्सपायरी डेट पर SIP करने से रिटर्न बेहतर हो सकते हैं। लेकिन क्या यह सच में काम करता है? आइए 22 साल के डेटा (2003-2024) के आधार पर देखें।

छोटी अवधि में F&O एक्सपायरी का फायदा

छोटे समय के लिए (1-3 साल) निवेश करने पर, डेटा से पता चला कि एक्सपायरी डेट पर SIP करने से 0.5% से 2.5% सालाना अधिक रिटर्न मिल सकता है। इसका कारण है:

  • Market microstructure effects – बाजार के छोटे-छोटे पैटर्न का फायदा
  • Institutional hedging और month-end rebalancing – बड़े निवेशक अपनी पोजीशन एडजस्ट करते हैं, जिससे मार्केट में हलचल आती है

लंबी अवधि में इसका असर

लेकिन अगर आप 10 साल या उससे ज्यादा के लिए निवेश कर रहे हैं, तो यह timing का फायदा लगभग नज़रअंदाज़ हो जाता है।

  • Law of Large Numbers – लंबे समय में निवेश का timing ज्यादा फर्क नहीं डालता
  • Consistency और Compounding – लंबी अवधि में नियमित निवेश और कंपाउंडिंग का असर ज्यादा महत्वपूर्ण है

असली गेम चेंजर: Rupee Cost Averaging

SIP का असली फायदा Rupee Cost Averaging में है, न कि तारीख के चयन में। यह तरीका ऐसे काम करता है:

  1. Market गिरने पर – आप ज्यादा units खरीदते हैं
  2. Market बढ़ने पर – आप कम units खरीदते हैं
  3. Average cost per unit कम – इस तरह market की उतार-चढ़ाव से नुकसान कम होता है

उदाहरण:
मान लीजिए आपकी मासिक SIP ₹5,000 है। अगर NAV ₹50 से ₹40 गिरता है, तो आप 100 units की बजाय 125 units खरीदेंगे। इससे आपका average cost कम हो जाता है और लंबे समय में रिटर्न बढ़ता है।

निष्कर्ष

F&O एक्सपायरी डेट पर SIP करना छोटे समय के लिए थोड़ा फायदा दे सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह कोई बड़ा फर्क नहीं डालता। असली ताकत है लगातार निवेश और Rupee Cost Averaging, जो लंबी अवधि में आपके पैसे को बढ़ाने में मदद करता है।ता है।

मिथक vs वास्तविकता

मिथकवास्तविकता
Perfect timing से guaranteed higher returnsDifference केवल 0.1-0.4% सालाना है
Month-end dates हमेशा बेहतर होती हैंMonth-end advantage marginal और inconsistent है
F&O expiry major advantages देती हैExpiry impact longer periods में fade हो जाता है
Starting date consistency से ज्यादा important हैConsistency और duration सबसे महत्वपूर्ण हैं

SIP निवेश की सही तारीख: कौन सा दिन सबसे फायदेमंद है?

SIP (Systematic Investment Plan) में निवेश करते समय सबसे ज्यादा सवाल आता है – कौन सी तारीख चुनें? कई लोग सोचते हैं कि सही तारीख चुनने से ज्यादा मुनाफा मिलेगा, लेकिन सच यह है कि timing से ज्यादा consistency और long-term investment मायने रखता है। आइए जानते हैं कैसे सही तारीख चुनी जा सकती है और किन बातों पर ध्यान देना चाहिए।


1. अपनी सैलरी साइकल के अनुसार तारीख चुनें

SIP की तारीख चुनते समय सबसे आसान तरीका है अपनी सैलरी साइकल को ध्यान में रखना:

  • सैलरी आने के 2-3 दिन बाद SIP date सेट करें।
  • सुनिश्चित करें कि आपके account में sufficient balance हो।
  • इससे auto-debit failure और late charges से बचा जा सकता है।

2. EMI और अन्य financial commitments का ध्यान रखें

SIP date चुनते समय आपके अन्य खर्चों को भी ध्यान में रखना जरूरी है:

  • Credit card या EMI की due date से पहले SIP करें।
  • अगर आप month-end में ज्यादा खर्च करते हैं, तो early date चुनना बेहतर होगा।
  • इससे आपका investment consistent और hassle-free रहेगा।

3. Multiple SIPs के लिए strategy

अगर आप अलग-अलग funds में SIP कर रहे हैं:

  • अलग-अलग funds के लिए अलग dates रख सकते हैं।
  • उदाहरण: 5वीं और 25वीं को split करना।
  • लेकिन ध्यान रखें, इससे administrative complexity बढ़ सकती है और ज्यादा फायदा नहीं होता।

4. Fund house की flexibility देखें

हर mutual fund company की SIP date options अलग होती हैं:

  • SBI MF: 1, 5, 10, 15, 20, 25
  • HDFC MF: 1-28 कोई भी date
  • Axis MF: 1, 7, 10, 15, 25
  • ICICI Prudential: 1, 7, 10, 15, 20, 25

बड़े निवेशकों के लिए:
₹50,000+ मासिक SIP में multiple dates में divide करना थोड़ा फायदेमंद हो सकता है, जैसे 10वीं और 25वीं। लेकिन यह administrative hassle बढ़ा सकता है।


5. Timing vs Time in Market

अध्ययनों से पता चलता है कि perfect timing से ज्यादा जरूरी है:

  • Start करना > Perfect timing: जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना बेहतर।
  • Consistency > Optimization: Regular investing, irregular timing से बेहतर है।
  • Duration > Date: 5+ साल का investment horizon सबसे महत्वपूर्ण है।
  • Amount > Timing: SIP amount बढ़ाना date optimization से ज्यादा फायदेमंद है।

6. डेटा क्या कहता है

15+ साल के data analysis से पता चला है:

  • छोटी अवधि (1-3 साल): 25वीं marginally better (0.2-0.4%) – economically insignificant।
  • मध्यम अवधि (5-10 साल): सभी dates के बीच minimal difference।
  • लंबी अवधि (15+ साल): Practically कोई difference नहीं, compounding और consistency matter करते हैं।

निष्कर्ष: Timing का effect long-term में negligible होता है।


7. अंतिम सलाह

सबसे अच्छी SIP date वो है जो:

  • आपकी salary cycle के साथ align हो।
  • आपको consistent investing में मदद करे।
  • Administrative hassle कम करे।
  • Account balance manage करना आसान बनाए।

ध्यान दें: ₹12 लाख के investment पर सबसे अच्छी और सबसे बुरी date के बीच फर्क सिर्फ ₹3,000-5,000 का होता है।

इसलिए focus करें:

  1. जल्दी शुरू करना
  2. Regular और consistent रहना
  3. Long-term perspective रखना
  4. SIP amount को gradually बढ़ाना

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