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58% Dearness Allowance October 2025: 1.15 करोड़ सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत

अक्टूबर 2025 से लागू होगा 58% Dearness Allowance (DA)


अक्टूबर 2025 से लागू होगा 58% Dearness Allowance (DA)

58% Dearness Allowance October 2025: 1.15 करोड़ सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत : अक्टूबर 2025 से महंगाई भत्ता (DA) 58% होने जा रहा है। यह 7वें वेतन आयोग के तहत आखिरी बढ़ोतरी होगी। इस फैसले से करीब 48.66 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और 66.55 लाख पेंशनभोगी यानी कुल 1.15 करोड़ से ज्यादा लोगों को फायदा मिलेगा।

58% महंगाई भत्ते का लागू होना और उसका असर समझना

महंगाई भत्ते में 55% से बढ़कर 58% होने की पुष्टि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर हुई है। श्रम ब्यूरो ने 31 जुलाई 2025 को जारी आंकड़ों में बताया कि जून 2025 का अखिल भारतीय CPI-IW 145.0 अंक रहा, जो मई 2025 से 1.0 अंक ज्यादा है। इसी आधार पर महंगाई भत्ता 58.17% निकलता है, लेकिन सरकारी नियमों के अनुसार इसे घटाकर 58% किया गया है।

7वें वेतन आयोग के नियम के अनुसार महंगाई भत्ता (DA) निकालने का सूत्र है:

DA% = [(पिछले 12 महीनों के AICPI-IW का औसत – 261.42) ÷ 261.42 × 100]

जुलाई 2024 से जून 2025 तक के 12 महीनों का औसत 413.50 अंक रहा। इस आधार पर महंगाई भत्ता 58.18% निकलता है।

अक्टूबर 2025 से लागू होगा 58% Dearness Allowance (DA) समयसीमा और कार्यान्वयन प्रक्रिया

अपेक्षित घोषणा अनुसूची

सितंबर 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल से 58% महंगाई भत्ते को मंजूरी मिलने की संभावना है। इसके बाद अक्टूबर 2025 से इसका भुगतान शुरू होगा। यह फैसला त्योहारों के मौसम के ठीक समय पर लिया जा रहा है, क्योंकि दिवाली इस साल 20 अक्टूबर को है। इससे सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को त्योहार से पहले अतिरिक्त आर्थिक सहारा मिलेगा।

कार्यान्वयन प्रक्रिया स्थापित प्रोटोकॉल का पालन करती है:

7वें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ते का ऐतिहासिक संदर्भ

यह 58% महंगाई भत्ता दर, 7वें वेतन आयोग के तहत हुई लगातार बढ़ोतरी का परिणाम है। जनवरी 2016 में महंगाई भत्ता 0% था, जो अब बढ़कर अक्टूबर 2025 में 58% हो गया है। लगभग दस साल में हुई यह बढ़ोतरी दिखाती है कि सरकार अपने कर्मचारियों की क्रय शक्ति (purchasing power) को महंगाई के बावजूद बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करती रही है।

कोविड-19 महामारी के दौरान महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी पर असर पड़ा। जनवरी 2020 से जनवरी 2021 के बीच महंगाई भत्ते की तीन किस्तें रोक दी गईं। इस वजह से 18 महीने तक कर्मचारियों को मिलने वाली बढ़ोतरी रुक गई। कर्मचारी संघों की लगातार मांगों के बावजूद, सरकार ने साफ कर दिया है कि इन रुकी हुई किस्तों का बकाया नहीं दिया जाएगा।

अक्टूबर 2025 से लागू होगा 58% Dearness Allowance (DA)वित्तीय प्रभाव विश्लेषण

वेतन स्केल में वेतन वृद्धि

3% महंगाई भत्ता बढ़ने से सभी कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी। यह बढ़ोतरी उनके मूल वेतन के आधार पर अलग-अलग होगी। जिनका न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 है, उन्हें हर महीने ₹540 अतिरिक्त मिलेंगे और उनका कुल वेतन ₹28,440 हो जाएगा। वहीं, जिनका मूल वेतन ₹1,00,000 है, उन्हें ₹3,000 अतिरिक्त मिलेगा।

पेंशनभोगी लाभ

केंद्रीय सरकारी पेंशनभोगियों की महंगाई राहत (DR) में भी उतनी ही बढ़ोतरी होगी। उदाहरण के लिए, जिन्हें न्यूनतम मूल पेंशन ₹9,000 मिलती है, उन्हें अब हर महीने ₹270 अतिरिक्त मिलेंगे। इससे उनकी कुल पेंशन बढ़कर ₹14,220 हो जाएगी। यह बदलाव खास है क्योंकि देश के कुल 66.55 लाख पेंशनभोगियों में से ज़्यादातर को इसका सीधा फायदा मिलेगा।

आर्थिक प्रभाव मूल्यांकन

इस महंगाई भत्ता बढ़ोतरी से सरकार के खजाने पर बड़ा बोझ पड़ेगा। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 में 2% महंगाई भत्ता बढ़ाने से सरकार को सालाना लगभग ₹6,614 करोड़ का खर्च आया था। इसी आधार पर अनुमान है कि जुलाई 2025 में 3% बढ़ोतरी से सालाना खर्च करीब ₹9,920 करोड़ होगा। यह सरकार के लिए एक बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी है।

7वें वेतन आयोग की अंतिम वृद्धि के रूप में महत्व

एक युग का अंत

अक्टूबर 2025 से मिलने वाला 58% महंगाई भत्ता बहुत खास है क्योंकि यह 7वें वेतन आयोग के तहत मिलने वाली आखिरी बढ़ोतरी होगी। 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो जाएगा। इसके मुकाबले, 6वां वेतन आयोग जुलाई 2015 में 119% महंगाई भत्ते के साथ समाप्त हुआ था। यानी इस बार कर्मचारियों को पिछले आयोग की तुलना में लगभग आधी दर से महंगाई भत्ता मिलेगा।

8वें वेतन आयोग में संक्रमण

जनवरी 2025 में 8वें वेतन आयोग की घोषणा और गठन से कर्मचारियों में भविष्य की वेतन बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है। हालांकि, इसका लागू होना अभी काफी देर से होता दिख रहा है। अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू मानी जाएंगी, लेकिन वास्तविक कार्यान्वयन 2027 या 2028 की शुरुआत तक ही हो पाएगा।

सरकार ने सात महीने पहले घोषणा तो कर दी थी, लेकिन अब तक न तो संदर्भ शर्तें (ToR) तय की हैं और न ही आयोग के सदस्यों की नियुक्ति की है। इसी कारण देरी हो रही है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का कहना है कि इसकी आधिकारिक अधिसूचनाएं “सही समय पर” जारी होंगी। लेकिन यह लंबा इंतज़ार कर्मचारियों के संगठनों में चिंता पैदा कर रहा है।

पिछले वेतन आयोगों के साथ तुलनात्मक विश्लेषण

58% महंगाई भत्ता दर अपने आप में महत्वपूर्ण है, लेकिन अगर पुराने उदाहरणों से तुलना करें तो यह थोड़ा कम माना जा सकता है। 6वें वेतन आयोग में महंगाई भत्ता 119% तक गया था, जिससे कर्मचारियों की क्रय शक्ति को ज्यादा मजबूती मिली थी। इसके मुकाबले, 7वें वेतन आयोग ने राजकोषीय अनुशासन (सरकारी खर्च पर नियंत्रण) पर ज्यादा ध्यान दिया और 2016 के बाद बदले हुए आर्थिक हालात को ध्यान में रखते हुए अपेक्षाकृत कम दर रखी।

5वें वेतन आयोग में यह व्यवस्था थी कि जब महंगाई भत्ता 50% तक पहुँच जाता था, तो उसे मूल वेतन में जोड़ दिया जाता था। इससे कर्मचारियों का बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता स्थायी वेतन का हिस्सा बन जाता था। लेकिन बाद के वेतन आयोगों में यह नियम बंद कर दिया गया। इसलिए अब महंगाई भत्ता अलग से दिया जाता है और यह स्थायी वेतन का हिस्सा नहीं बनता।

निष्कर्ष

अक्टूबर 2025 से महंगाई भत्ता बढ़कर 58% हो जाएगा। इससे लगभग 1.15 करोड़ (11.52 मिलियन) केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। यह कदम दिखाता है कि सरकार लगातार कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की क्रय शक्ति को महंगाई से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि यह दर पहले की तुलना में कम है और 7वें वेतन आयोग का आखिरी संशोधन भी माना जा रहा है, लेकिन त्योहारों के समय यह बढ़ोतरी लाभार्थियों को तुरंत आर्थिक सहारा देगी।

8वें वेतन आयोग लागू होने से पहले, कर्मचारियों की वेतन वृद्धि का मुख्य आधार महंगाई भत्ता ही रहेगा। इससे साफ है कि सरकार एक तरफ कर्मचारियों के हितों का ध्यान रख रही है और दूसरी तरफ खर्चों को संतुलित करने की कोशिश भी कर रही है। हालांकि, 8वें वेतन आयोग के गठन में हो रही देरी से यह अंदाजा लगता है कि बड़ा वेतन सुधार अभी कम से कम दो साल तक नहीं होगा।

अक्टूबर 2025 से लागू होने वाले बदलाव से केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा। इसमें प्रवेश स्तर के कर्मचारियों को हर महीने लगभग ₹540 का अतिरिक्त भत्ता मिलेगा, जबकि वरिष्ठ पदों पर यह राशि और ज्यादा होगी। इसका उद्देश्य यह है कि बदलते आर्थिक हालात में सरकारी कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनी रहे।

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